ओम नमः शिवाय शिवाय नमः ॐ ।
सभी आत्मीय मित्रों को सादर नमस्कार। जिस आध्यात्मिक क्रियाकलाप में किसी की मानसिक शांति भंग होती हो या अन्य किसी के मन में बेचैनी होती हो तो वह पाप है । दूसरे के मन में शांति के उपाय करना ही महान धर्म है । पर सेवा, दीन-हीन की सेवा ,अनाथ ,गरीब की सेवा ,अबला ,विधवा की सेवा आदि अनेकों अनेक ऐसे कर्म है जो इस संसार में पुण्यशाली हैं ।आध्यात्मिक क्रियाकलाप वर्तमान में मात्र धन उपार्जन का साधन मात्र रह गए हैं । भौतिकवादी प्रवृतियों से साधु ,सन्यासी ,धर्मोपदेशक आदि माया में लिप्त हो गए हैं । दूसरों को भौतिकवादी प्रवृतियों से दूर रहने का उपदेश करने वाले अनेकों अनेक भौतिक संसाधनों से लिप्त हैं ।अनेकों अनेक धार्मिक स्थान नाना प्रकार की माया जोड़ कर स्वयं ही माया मोह से वशीभूत हो रहे हैं । वैराग्य तो आज लुप्त हो गया है मात्र एक दिखावा भर रह गया है ।
वर्तमान के परिपेक्ष्य में सबसे सर्वश्रेष्ठ यह है कि हम जहां पर भी हैं जैसे भी हैं उस स्थान पर निष्काम भाव से कर्म करते रहें और अपना जीवन सफल बनाएंगे ।
रविवार, 28 जुलाई 2024
मन की बात
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