मुझे पता चल चुका है कि मेरी औकात क्या है, अंतः करण में अधिकृत जो भी विचार आते हैं शायद वह परमात्मा की ही देन होती होगी लेकिन दूसरा उन विचारों की कितनी इज्जत करता है इसे देखकर यही पता लगता है कि हमारी औकात क्या है।
आज पता चल चुका है कि एक घर में बहुत से लोगों के बीच में रहकर किस प्रकार अपने अंतःकरण की आत्मा की आवाज को दबा कर रहना पड़ता है बड़ा दुख होता है उस समय जब हमारे विचारों को सम्मान करने वाला कोई भी नहीं रहता है।
मात्र एक माया के द्वारा आच्छादित इस जगत में वास्तविकता में देखा जाए तो कुछ भी नहीं है हर कोई अपने को ही सर्वश्रेष्ठ समझता है दूसरों के विचारों को सम्मान करना तो अपने ऊपर व्यक्ति को बहुत बड़ा दुख लगता है।
आज का व्यक्ति अपने भीतर परमेश्वरी सत्ता को बुलाकर मन के विचारों को वरीयता देता है, वर्तमान में जिस प्रकार से समाज में एक छूत की बीमारी चल रही है उससे भी व्यक्ति को सामंजस्य बैठाने की आदत नहीं है।
परमात्मा करे वर्तमान का यह महामारी ग्रस्त समय पूर्ण रूप से शांत होकर चला जाए ,परमात्मा किसी को भी कोई दुख ना दे लेकिन स्वयं में दुख इस बात का है कि हमारे विचारों का सम्मान हमारे घर के भीतर ही नहीं होता है तो इससे मन बड़ा क्षोभित और अंतःकरण बड़ा दुखित होता है।
बढ़ा अच्छा रहा यह समय जो हमें हमारी औकात से क्षण प्रति क्षण रूबरू करवा रहा है, किस प्रकार सामंजस्य बैठाकर अपने मन को कुचलकर दबाकर रहना पड़ता है यह सब इन चक्षुओं से देखने को मिल रहा है, कभी तो अंतरात्मा में यह विचार आ रहे हैं आखिर हे परमात्मा तूने कैसे जाल में मुझे डाला ,जहां अपना ही कोई अपने ही विचारों को सुनने वाला नहीं है, सो मात्र एक यही विचार आया कि जो हम स्वयं में हैं हम ही हम हैं, स्वयं के ही विचारों को प्रधानता देनी है और स्वयं में ही जीना है, हे मां जगजननी परमेश्वरी आदि शक्ति भवानी तेरे सिवा कोई भी तो नहीं है मेरा इस संसार में एकमात्र तू ही तो परम सत्ता है जो मुझे इस समय में सफलता दे रही है आखिर कौन सुन रहा है मेरी।
हे आदि शक्ति शिव जगदंबिके भवानी अंतः करण में विराजित होकर बुद्धि को तू ही तो प्रवृत्त कर रही है, जबकि अन्य सोच रहे हैं कि यह करता है जबकि मां भवानी तू जानती है मैं तो किसी प्रकार से कोई करता हूं ही नहीं हर पल हर क्षण तू ही तो मुझे चला रही है।
मां तूने समय पर मुझे अपनी औकात के साक्षात दर्शन करा दिए हैं। मां तू धन्य है तेरी जय जयकार है कि तूने मुझे अपनी औकात समय पर बता दी।
रविवार, 28 जुलाई 2024
औकात
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें