रविवार, 28 जुलाई 2024

भीतर का सत्य

ओम नमः शिवाय शिवाय नमः ॐ
सभी आत्मीय मित्रों को सादर नमस्कार ।
हम स्वयं में अनन्य शक्ति के तेज पुंज हैं। हमारे भीतर अपार शांति है । हमें जो भी  शांति को भंग करने वाली चीजें हैं वह भौतिकवादी बाहर की ही शक्तियां हैं । अनेकों अनेक बाहरी दुनिया का उस में योगदान है ।हमारे भीतरी स्वरूप को परिभाषित करने के लिए हमें कहीं पर भी नहीं जाना है। हम जहां पर हैं, जिस स्थान में हैं ,जो भी कर्म कर रहे हैं, वह सर्वश्रेष्ठ है और हमें अपने को पहचानने के लिए कहीं भी नहीं जाना है। अपनी आत्मा के स्वभाव को उसकी आवाज को हमें पहचानना पड़ेगा और एकाग्र शांत होकर गहरा ध्यान करना पड़ेगा और इसके लिए जो एकांत स्थान उत्तम है । ध्यान से हम अपने भीतर झांकने की कला का विकास कर लेते हैं। अंतःकरण के चाक्षु इस से खुलने लगते हैं ।ध्यान की कला को जानने से नये नरेंद्र सृजनात्मक विचारों का जन्म होने लगता है और जिससे सृजनशीलता की शक्ति उत्पन्न होती है ।हम जब गहरे ज्ञान ध्यान में उतरते हैं तो हमारे भीतर प्रभु परमात्मा के द्वारा दिया हुआ आशीर्वाद प्रस्फुटित होने लगता है और हम अपने स्वरूप को पहचान कर परम आनंद की अनुभूति को प्राप्त करने लगते हैं ।
🥀परमहंस राधे राम
📲97195 92618 उत्तराखंड

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