विश्व परिदृश्य में लॉक डाउन आज मेरी जिंदगी में पहली बार देखने को मिला। यह लाकडाउन जिसमें प्रकृति एवं मानव के बीच युद्ध दिख रहा है। प्रकृति मानो मनुष्य से कह रही है कि मैं अपने ऊपर अत्याचार को हद से ज्यादा सहन नहीं कर पाती हूं। अतः अभी भी सुधर जाओ अपना सादगी पूर्वक जीवन यापन करो और भोग विलास के पीछे मत भागो क्योंकि परमात्मा ने जिसको भी उत्पन्न किया है ,उसके लिए खाने-पीने रहने का इंतजाम अवश्य सोचा है। लेकिन आज का मानव भोग विलास की अंधी दौड़ में इतना पागल हो चुका है कि उसे अपना पराया कुछ भी नहीं सूझ रहा है।
इस लाकडाउन में एकांत भाव से सोचो तो बहुत कुछ सोचने और समझने को मिल रहा है कि हम किस प्रकार अपनी जरूरतों को सीमित करके एक आनंद पूर्वक जीवन व्यतीत कर सकते हैं, जीवन जीने के लिए बहुत सारे उपकरण अर्थात बहुत सारे भोग विलास ओं की आवश्यकता नहीं पड़ती है मनुष्य अपने सीमित संसाधनों के द्वारा भी एक आनंद का जीवन जी सकता है लेकिन हमारे अंदर के जो राग हैं ,वही हमें शांत भाव नहीं होने देते हैं इसीलिए अनेका अनेक प्रकार के रोग आज के मानव को व्याप्त हो गए हैं।
वर्तमान में कोरोना नामक बीमारी भी एक छुआछूत की बीमारी ही है ,जो एक दूसरे से इस कदर व्याप्त हो रही है कि थोड़ा सा भी कोई किसी को छू ले तो वह छूत की बीमारी की तरह व्याप्त हो रही है लेकिन जिसका हमारे ऋषि-मुनियों ने पहले ही उपचार बताया हुआ था कि किसी जाने-अनजाने के हाथ का खाना मत खाओ, किसी रजस्वला के हाथ का खाना मत खाओ, नातक, सूतक, मृत्यु भोज, पीपल पानी का भोज ,वार्षिक श्राद्ध का भोज, किसी भी अनजान व्यक्ति के घर का मत खाओ, इत्यादि का भेद करो बिना हाथ-पांव मुंह धोए भोजन मत करो। बिना संध्या करे भोजन मत करो, लेकिन आज का मनुष्य तो अपने ही सनातन संस्कृति को बुलाकर अंधा हो चुका है जिसका खामियाजा वह वर्तमान में कोरोना नामक बीमारी से भोग रहा है।
हमारे पूर्वजों ने कुत्ते को भी छूत की बीमारी के समान समझा था और इसे घर के दरवाजे के भीतर किसी भी हाल नहीं आने देते थे लेकिन आज देखो घर घर में कुत्ते पाल रखे हैं जो कुत्ते मल को खाते हैं वह घर के भीतर क्या शुद्धि को रख पाएंगे एक फैशन बना दिया है लोगों ने कुत्तों के घर के अंदर डालना और आने वाले वक्त में एक महामारी ऐसी और आएगी कि घरों में लोग कुत्ते पालना भूल जाएंगे, हमारे ऋषि मुनि पूर्वज इतने विद्वान थे कि उन्होंने इन चीजों को इन परंपराओं को किसी ना किसी कहानी से जोड़ दिया तो आदमी उनको खाली कथा कहानी समझकर हल्का करके लेता है जबकि कुत्ते को शिवजी एवं पार्वती का श्राप है वह शिव जी के द्वारा श्रापित है तो ऐसे प्राणी को पालना एक नर्क गामी कर्म ही है, कुत्ता यदि आपने पालना ही है तो अपने घर के दरवाजे के बाहर ही उसे रखा जाना चाहिए।
लाडला उनके समय माननीय मोदी जी का प्रधानमंत्री बनना देश हित में एक बहुत बड़ा मायना है क्योंकि मोदी अपने में एक सन्यासी ही हैं वह एक किसी महाशक्ति का अवतार हैं जो ऐसे समय पर भारतवर्ष में मनोनीत परमात्मा के द्वारा हुए हैं कि लोगों का मनोबल ना टूटे और लोगों की एन केन प्रकारेण रक्षा की जाए।
लेकिन भारतवर्ष की जनता तो ऐसी है कि वह अंगुली ही लोगों पर उठाती है, लोगों ने भगवान राम को नहीं बख्शा, लोगों ने भगवान कृष्ण को नहीं बख्शा, तो मोदी क्या बिसात हैं इन्हें भी वह इस समय के बीतने के बाद आरोप लगाएंगे लेकिन यह भारत का एक बहुत बड़ा सौभाग्य है कि इस समय सनातन धर्म के पुरोधा हमारे प्रधानमंत्री हैं हमारे राजा हैं और शिव जी का जिन पर पूर्ण आशीर्वाद है वह भारतवर्ष को अवश्य इस महामारी से मुक्त कराकर एक शिखर पर स्थापित करेंगे।
रविवार, 28 जुलाई 2024
लाक डाउन 2020
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें