वर्तमान का समय बड़ा ही विकट परिस्थितियों से भरा है, आज चारों तरफ अनीति, भ्रष्टाचार ,झूठ, कपट ,छल प्रपंच आदि का ही बोलबाला है । हर कोई अपना ही मतलब साध रहा है, चाहे वह साधु सन्यासी हो ,गृहस्थ हो, धर्मोपदेशक हो, शिक्षक हो या कोई भी हो ।
लेकिन हमारे भीतर एक दैवीय शक्ति निवास करती है ।जो हमें पल पल में राह दिखाती है, हम किसी भी कार्य को करते हैं तो वह हमें सचेत करती है । यही शक्ति भगवान होती है लेकिन हम अपने अंदर की आवाज सुनकर यत्र-तत्र विचरण करते हैं और भटकते रहते हैं जबकि परमात्मा हमारे भीतर ही निवास करता है। भगवान तो कहीं रहता ही नहीं है वह तो हमारे साथ हर क्षण क्षण में है।
रविवार, 28 जुलाई 2024
चाहे मानो न मानो
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