❤❤ॐ नमः शिवाय
शिवप्रभात-शुभप्रभात जी🙏🙏
प्रिय आत्मन मित्रो.....!!!!!
स्वर्ग और नर्क भोगते-भोगते जो थक गया, जिसने अब ठान लिया कि अब इससे आगे की यात्रा पर उतरना है, वह निष्क्रिय हो जाएगा। भोग भोगे बिना कटेंगे नहीं। इसलिए जो कल तक बीज दिया उसे काटने में उतरिये और नूतन कोई कर्मों की खेती न बीजें।
ये तभी सम्भव है जब आप जाग जाएंगे, और जागरण होगा ध्यान से। ध्यान तभी घटित होगा जब आप राजनीति की दलदल से निकलकर स्वयं के साथ कुछ पल के लिए एकाकी हो जाएंगे।
भीड़ में कभी भी स्वयं का विश्लेषण नहीं हो सकता। भीड़ आपको अपना हिस्सा बना लेती है और एकांत आपकी खण्ड-खण्ड चेतना को अखण्ड में उतार देता है।
कई महात्मा लोग कहते हैं क्या पड़ा है पहाड़ों, पथरों में। दुर्भाग्य है उन साधुओं का, गुरुओं का जो साधु तो हो गए किन्तु साधना उनके नसीब में नहीं।
हमारा इतिहास कहता है जिसने भी स्वयं को जाना, परमात्मा को अनुभव किया, आत्मज्ञान को प्राप्त किया, सब एकांत में, जंगलों में, पर्वतो की चोटियों पर, कन्दराओं में किया।
सभी गुरुलोग, कथाकार, महात्मा लोग वर्णन उन्ही ऋषियों मुनियों का करते है जो त्याग और तप की मूरत थे, सुनाते भी उन्हीं की गाथा हैं जो सिद्ध थे, किन्तु जीवन जीते हैं बिल्कुल विपरीत--भोग विलासिता का। ज्ञान तो सब है किन्तु किताबी, कभी किसी गुरु की शरण में रहकर अनुभूति की होती तो अनुभव से कहते और अनुभव में जीते।
समस्त कर्मकांड, तन्त्र, मन्त्र, क्रियाए, हिप्नोटिसम है, जितना करते हैं स्वयं ही समाहित होते जाते हैं, एक स्वप्न्न संसार में घूमते रहते है।
ध्यान में उतरिये, सीधा-सीधा निर्दोष बालक की तरह हो जाइए, बहुत हुए चुस्त-चालाकियां। हम दूसरों को नहीं, खुद को ही मीठी गोली दे रहे होते हैं।
जागिये, बहुत हुई निंद्रा!
हम ऋषि लोग आपको मीठी गोली देकर आपकी भाषा नहीं बोल सकते। हमे आपसे कोई अपेक्षा नहीं। संसार अधिक से अधिक हमे पदार्थ ही दे सकता है, परमात्मा नहीं।
हम ऋषियों के पास कड़वी गोलियां ही हैं, जिसे भीतर उतार पाना बहुत मुश्किल है, अगर एक बार मन को मारकर इस गोली को भीतर ले गए तो जन्मों-जन्मों के रोग मिट जाएंगे।
प्रभु पल-पल आपकी प्रतीक्षा में बाहे फैलाएं खड़ा है। इससे पहले की चूक जाओ- जाग जाओ।
प्रभु हम सबका कल्याण करें।
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