रविवार, 28 जुलाई 2024

साधु सन्यासी ही गृहस्थी बन बैठे।

आज के समय के वर्तमान परिपेक्ष में साधु संत या सन्यासी कहने वाले समाज ने अपनी प्रासंगिकता ही खो दी है ।आज साधु संत या सन्यासी होना मात्र अपने जीविकोपार्जन का साधन होना या बड़े-बड़े आश्रमों के मठाधीश बन कर पूरे सुख भोग प्राप्त करना रह गया है। जिधर देखो साधु संत का कंचन कामिनी में ही आसक्त हैं और अपने मानने वालों को तो शिक्षा देते हैं यह माया मोह सब बेकार है, धन दौलत हमारे साथ नहीं जाएगा लेकिन देखने में उनके आचरण में आता है कि वह पाई पाई दाने दाने के लिए लड़ रहे हैं बड़े-बड़े आश्रमों की मठाधीश की गद्दियों के लिए न्यायालयों में वाद चला रहे हैं, ऐसे ही सन्यासियों के कारण या मठाधीश के कारण ही आज समाज में अनेका अनेक विसंगतियां भर गई है और लोग लोकाचार को भूल चुके हैं।
यदि संत परंपरा को मानना ही है तो सर्वप्रथम हमें ऐसे जीवन मुक्त साधु या सन्यासी की खोज करनी है जिसके लिए तृण और सोना सब एक समान है, मठ आश्रम झोपड़ी आदि के प्रपंच से दूर है और ऊंच-नीच का उसमें कोई भेद नहीं है, हमें ऐसे ही की ही शरण ग्रहण करनी है जो अपने को तार सका है वही तो तार पाएगा ‌।जो अपने से माया मोह की आसक्ति को, मठ आश्रम की आसक्ति को दूर नहीं कर पाया है तो वह क्या खाक हमारा उद्धार कर पाएगा सपने में भी ऐसी उम्मीद ना रखे कि जो बड़े-बड़े आश्रम को चला रहा है बड़े-बड़े मठों का मठाधीश बनकर महंत गिरी कर रहा है वह कदापि भी जीवन का उद्धार कर ही नहीं सकता है ।वह जीवन की नैया को पार लगा ही नहीं सकता है ,क्योंकि उसे तो स्वयं में पता ही नहीं है कि माया मोह को दूर कैसे करना है।
हमें ऐसे मास्टरमाइंड व्यक्ति की तलाश करनी है जो स्वयं को ही तमाम पंचों से मुक्त करते हुए अपने को जीवन मुक्त कर चुका है।
ईश्वर बड़ा दयालु है यदि हम सच्चे मन से प्रार्थना करेंगे तो वह हमारे सम्मुख ऐसे संत को अवश्य खड़ा कर देता है जो हमें जिंदगी का मूलभूत सार तत्व बड़े खेल खेल में पलभर में समझा देता है कि यह जीवन वास्तव में है क्या।
हम भौतिकवादी गतिविधियों को देखकर यह समझने लग जाते हैं कि यही प्रगति है यही सुखों का मूल है लेकिन वास्तव में ऐसा है नहीं भौतिकवादी गतिविधियों से तो मात्र इच्छाएं बढ़ती है इच्छा बढ़ने से क्रोध उत्पन्न होता है क्रोध भरने से इनकार की उत्पत्ति होती है और अहंकार होने से व्यक्ति अपने को विशिष्ट समझने लग जाता है। अतः परम पिता परमेश्वर से हर समय अंतःकरण में बस एक ही प्रार्थना करनी चाहिए हे प्रभु किसी ऐसे जीवन मुक्त व्यक्ति को हमें दिलवा दो जो हमें जिंदगी के खेल को खेल खेल में पलभर में समझा दे।

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