रविवार, 28 जुलाई 2024
व्यथा
हरि ओम नमो परमात्मने।
सभी आदरणीय मित्रों को सादर नमस्कार।
आज जिंदगी की आपाधापी में प्रत्येक मनुष्य किसी ना किसी रूप से परेशान है। अनेक आदि व्याधि से ग्रस्त हैं।
इन परेशानियों से बचने के लिए मनुष्य इधर उधर भटक रहा है। फिर भी उसे कोई सुगम मार्ग नहीं दिखाई दे रहा है और वह वर्तमान में लोगों द्वारा ठगा जा रहा है। हमें यह याद रखना होगा कि इस संसार में कोई भी किसी के लिए कुछ नहीं करता है सब एक-दूसरे से स्वार्थ के वशीभूत आबद्ध हैं। इस संसार में मात्र हमारे भीतर जो सत्य प्रकाशित हो रहा है वही सर्वश्रेष्ठ है जो हमें पग-पग पर मार्ग प्रदर्शित करता है और हमें जीवन दे रहा है। संसार में यदि कुछ सर्वश्रेष्ठ है तो वह बिना किसी स्वार्थ के दूसरे की सेवा करना है दूसरे की सेवा से बड़ा कोई भी धर्म इस संसार में नहीं हुआ है। चाहे कोई कितना भी जतन कर ले लेकिन कोई किसी का उद्धार करने का दावा नहीं कर सकता है। क्योंकि हम जैसा करेंगे हमें वैसा ही भरना पड़ेगा यदि हम पेड़ काटे वाला लगाएंगे तो हमें कांटे ही मिलेंगे और मीठे फलों का पेड़ लगाएंगे तो हमें मीठा ही मिलेगा बाकी तो इस संसार में सभी भ्रम है भ्रम के सिवाय कुछ भी नहीं है मात्र यह हमें याद रखना होगा कि हम जैसा कर्म करेंगे वैसा हमें फल मिलेगा।
आज वर्तमान के समय में धर्म की व्याख्या बेहद कठिन हो गई है मात्र धर्मांधता एवं ऊंच नीच जाति पात का भेदभाव से समाज खोखला हो गया है इस खोखले पन की वजह से समाज में अनेक प्रकार की विसंगतियां जन्म ले रही है और भाई भाई का दुश्मन बन बैठा है । हमें अपने जीवन में यह याद रखना होगा कि हम जैसी संगति में रहेंगे वैसा ही हमारे जीवन पर प्रभाव पड़ेगा। यदि हम उच्च कोटि के विद्वानों के बीच अच्छे संगति के बीच बैठेंगे तो हमारे अंदर वैसे ही गुण आएंगे और हम यदि ओछे घमंडी मनुष्यों के बीच बैठेंगे तो वह चीज भी हमारे अंदर अवश्य घर करेगी । मैं अपने जीवन में यह बात गांठ बांध कर रख लेनी चाहिए हम जैसा होना चाहते हैं वैसे ही संगति को करना प्रारंभ कर दें और हम वैसे एक ना एक दिन अवश्य हो जाएंगे आज धर्म के नाम पर बहुत सारी विसंगतियां हमारे देश में पनप रही हैं जो नितांत आडंबर एवं मूर्खतापूर्ण ही हैं। धर्म के नाम पर धन इकट्ठा करना ही मात्र वर्तमान का एक काम रह गया है।
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