एक अविरल शांति सी आने लगी है,
परब्रह्म की कृपा के झोंके लाने लगी है,
परम सौंदर्य सुभाषित गंध आने लगी है,
प्रकृति की रम्य गोद में बहार छाने लगी है।
ओ मेरे मन के मीत ,मेरे शिव जोगी,
तेरी मधुर मुस्कान की यादें आने लगी
तू कण-कण में व्याप्त सर्वव्यापक है
तू ही तो है जो सूर्य की आभा मंडल में व्यापक है ।
तुझसे ही रचा बसा यह संसार है,
सृजनकर्ता तू ही तू ही तो पालनहार है,
ओ मेरे समय प्रहरी पल पल तेरी ही माया का विस्तार है,
मायातीत तू ही तू ही परम ब्रह्म पुनीता है।
घट घट में व्यापक तू ही सर्वव्यापक है,
अनामय अविनाशी तू ही तो मेरा पालक है,
सर्वस्व स्वामी तू ही मेरा प्राणाधार है,
क्यों चिंता करूं जब तू ही मेरी जीवन का आधार है।
रविवार, 28 जुलाई 2024
अविरल शांति
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