भगवान को कहीं भी ढूंढने के लिए नहीं जाना होता है, वह तो स्वयं हमारे अंतकरण के भीतर हर पल विराजित है और हम उसे यत्र तत्र ढूंढने की कोशिश में रहते हैं। भगवान हमारे हर सांस में विराजित है बस उसे अनुभव करने की आवश्यकता है।
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