ओम नमः शिवाय शिवाय नमः ॐ।
सभी आत्मीय मित्रों को सादर नमस्कार।
मैं सत्य हूं ,जीवन रुपी शक्ति में शिव का अंश हूं ।मैं ही ईश्वर हूं ,संसार की पराभव शक्ति का प्रतीक स्वरूप भी मैं ही हूं। अपने द्वारा किए गए कर्मों का भुगतान स्वयं मैं ही करता हूं ।अपना दीपक भी मैं ही हूं ।यह संसार नाना विषमताओं से व्याप्त है सत्य अन्वेषण का प्रत्यक्षदर्शी भी मैं ही हूं ।ओम नाद का श्रोता भी मैं ही हूं । भृकुटी मध्य से प्रकट होने वाले सत्य का प्रकाश भी मैं ही हूं। मैं सत्य सनातन हूं ।हृदयस्थ वासुदेव जनार्दन की महान अहैतुकी कृपा मुझ पर है। परम नाद का श्रोता मैं हूं ।मैं सत्य हूं सत्य हूं। संसार सागर से पार उतरने को स्वयं अपने हृदय से भगवान का ध्यान करना ही सर्वस्य श्रेष्ठ है क्योंकि जिससे हम चाहना कहते हैं वह कुछ भी नहीं है। जो कुछ भी है स्वयं अपने भीतर है हम किसी को अपना गुरु और सद्गुरु मानने से पहले अवश्य उसकी परीक्षा कर लें क्योंकि हमें भवसागर से पार वही कर सकता है जो स्वयं भवसागर से पार हो चुका हो और जीवन मुक्त हो।
रविवार, 28 जुलाई 2024
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