समय बीतता गया उसके पश्चात राजा झालूराई के घर में एक बालक का जन्म हुआ जिसको राजा की सौतेली पत्नियों ने नेपाल में काली नदी में एक लोहे के पिटारे में बंद करके बहा दिया जो पिटारा नीचे की तरफ को बहने के बजाय पहाड़ों की तरफ को बहने लगा और बहते बहते पिथौरागढ़ में काली और गोरी के संगम पर एक मछुआरे को वह पिटारा दिखा तो पिटारे को उसने बाहर निकाला जिसमें से एक सुंदर बालक प्राप्त हुआ।
की तो बनती है जिस समय बालक को पिटारे में रहने के लिए छोड़ा गया उसी समय बटुक भैरव ने अपने संपूर्ण आंसुओं की कलाओं के साथ बालक में अवतार ले लिया।
अब बालक मछुआरे के घर में शनै शनै बड़ा होने लगा और बड़ा होकर उसने अपने लिए एक लकड़ी के घोड़े को बनाने के लिए अपने पिताजी से अनुरोध किया, उन्होंने बालक को लकड़ी का घोड़ा बनाकर दे दिया जिसको लेकर वहां चंपावत के गोरिल चौड़ मैदान में आए जहां पर राजा झालूराई का महल था और अब वर्तमान में चंपावत की तहसील है।
इस मैदान के एक कोने पर पानी का नौला है पानी के नौले पर पहुंचकर बालक ने कहा मैं अपने लकड़ी के घोड़े को पानी पिलाऊंगा। जहां पर राजा की सात रानियां पानी भरने आई हुई थी, तो बालक की बात सुनकर रानियों ने कहा कहीं लकड़ी का घोड़ा भी पानी पीता है तो बालक ने कहा जब एक स्त्री के पेट से सिल और बट्टा हो सकता है तो मेरा घोड़ा पानी क्यों नहीं पी सकता है। यह बात जब रानियों ने सुनी तो वह है के कारण राजमहल को भागी और पूरे इलाके में खबर फैल गई कि एक बच्चा लकड़ी के घोड़े को पानी पिलाने के लिए आया है और कह रहा है कि स्त्री के पेट से सिलबट्टा हुआ तो मेरा थोड़ा भी पानी पी सकता है अतः यह बात जब राजा के कानों में पहुंची तो उनका माथा ठनका उन्होंने सोचा कि मेरी रानी कालिका के पेट से ही सिलबट्टा होने की कहानी को कहा गया था आखिर यह माजरा क्या है उन्होंने उस बालक को अपने महल में बुलवाया जब बालक महल में आया तो सातों रानियां कहने लगी यह झूठ बोल रहा है यह छल फरेब से राज्य को हथियाना चाह रहा है तो राजा ने कहा तुम कालिका के पुत्र हो इसका क्या सबूत है।
बालक ने कहा यह सातों रानियां जो भी प्रमाण देने को मुझ से कहेंगे मैं वह प्रमाण को दूंगा तो रानियों ने कहा तुम इस राजमहल से जहां पर पानी का वह नौला है वहां पर अपनी मां का दूध पियो अर्थात राजमहल से तुम्हारी माता कालिका दूध की धार अपनी छाती से फेंके और जहां पर गोरिल चौड़ का यह मैदान है वहां पर तुम्हारे मुंह में दूध की धारा गिरनी चाहिए तो गोलू देवता ने यह स्वीकार कर लिया।
राजमहल से बालक की माता ने अपनी छाती से दूध की धार फेंकी तो वह उस बालक के मुंह में गिरी तब से चंपावत में बाला गोरिया का राज्य रहा।
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