रविवार, 28 जुलाई 2024

परमात्मा

जब पूर्ण परमेश्वर परमात्मा का हर पल मेरे साथ साया है तो फिर मुझे इतना डर क्यों  ?आखिर कौन सा विषाद ग्रस्त यह योग उत्पन्न हो गया है जो ऐसे महामारी ग्रस्त समय पर मेरा हृदय स्वयं में ही नहीं मान पा रहा है ‌।जबकि मुझे स्वयं में पता है कि हर पल मेरे साथ एक परम शक्ति है और इस दुख को आने से पहले ही उसने मुझे चेता दिया था तो फिर भी ऐसा क्यों है ? भगवान मन को तो किसी ना किसी प्रकार शांत कर ही देना क्योंकि मन ही व्यथाओं की जड़ है।
भगवान किस प्रकार इस मन को समझाना है तुरंत उपाय करो भगवती तू तो घट घट के वासी है, क्या यही मेरा प्रारब्ध है कि इस प्रकार वर्तमान का जीवन जीना है। जब तू मेरे साथ हर पल हर समय है तो फिर भय कैसा, इस भय को तो स्वयं अपने ही अंदर मजबूत होकर भगाना ही होगा ,उसको दूर करना ही होगा ।जो अभी आया नहीं है उसके लिए चिंता कैसी, जो अभी हुआ नहीं है उसके लिए अभी से दुख के साथ क्यों जीना,  वर्तमान में जीवन जीने की कला सीखनी होगी। वर्तमान में जीवन जीना ही सबसे ज्यादा आनंद पूर्वक है ,देखो बाहर कितनी सुंदर हवा चल रही है, कितना आनंद इस प्रकृति में हो रहा है। सामने मंदिर से हनुमान चालीसा का मधुर मधुर संगीत आ रहा है ,लेकिन फिर भी मन आने वाले भविष्य की चिंताओं से विषाद ग्रस्त होकर अनेका अनेक दुखों से परिपूर्ण हो रहा है।
मुझे उस परम सत्ता पर विश्वास करके जीना ही होगा, हर पल जीना ही होगा, जब मेरे साथ हर पल हर सांस में प्रभु हैं तो फिर यह भय कैसा ? यह भय कैसा? यह दुख कैसा? उसने तो हमारे लिए जो कुछ सोचना है ,वह अवश्य सोच रखा है तो फिर यह दुख कैसा?
हे परमात्मा तेरी कृपा का एक-एक अमृत मुझ पर बरसने लगा है, अब कृपा कर इस संसार से इस महामारी को समाप्त करो भगवान, विष्णु भगवान अपनी इस माया को इस संसार से अब तो समेटिये प्रभु, इस संसार को भय से मुक्त कर प्रत्येक प्राणी को भय मुक्त करो भगवान ।आखिर ऐसा कब तक।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें